हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , रूसी विज्ञान अकादमी के प्राच्यविद्या संस्थान की वरिष्ठ विशेषज्ञ दोनायेवा ने एक साक्षात्कार में यह कहते हुए कि ईरान के शहीद नेता ने 37 वर्षों के नेतृत्व के दौरान इमाम खुमैनी (र.ह.) के मार्ग को जारी रखा और इस्लामी क्रांति की उपलब्धियों की रक्षा की कहा कि उन्होंने ईरान-इराक युद्ध और इमाम खुमैनी (र.ह.) के निधन के बाद एक कठिन दौर में देश का नेतृत्व संभाला।
उन्होंने आगे कहा,उस समय नई परिस्थितियों में ईरान की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण और सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक क्षमता का विकास करना आवश्यक था ताकि इस्लामी क्रांति के मुख्य लक्ष्यों और कार्यों को प्राप्त किया जा सके। दोनायेवा ने कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई के सुविचारित निर्णयों ने ईरान को सामाजिक और आर्थिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद की।
उन्होंने आगे विदेशी क्षेत्र का भी उल्लेख करते हुए कहा,आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने राष्ट्रीय हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए वार्ता और समझौता करने की क्षमता रखी। साथ ही जब पश्चिमी प्रतिबंधों ने आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया तो ईरानी नेता ने 'प्रतिरोध अर्थव्यवस्था' की नीति पेश की और देश के विकास के मुख्य मार्गों को निर्धारित किया।
इस रूसी प्राच्यविद् ने अंत में कहा,ईरानी लोगों ने दिखाया कि नेता और कुछ अधिकारियों का खो जाना न केवल देश को कमजोर नहीं करता है बल्कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उनके एकता और इच्छाशक्ति को मजबूत करता है।
उन्होंने रूस के साथ संबंधों को विकसित करने के लिए ईरान के शहीद नेता के सकारात्मक दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा,ईरान के सर्वोच्च नेता ने अपने दृष्टिकोण के साथ दिखाया कि दोनों देशों के बीच सहयोग फायदेमंद हो सकता है।
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